विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में मुख्य पिण्ड केवल तीन पीढ़ियों—पिता, पितामह और प्रपितामह—को दिया जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार यजमान के शरीर में पूर्वजों से प्राप्त अंशों में इन तीन पीढ़ियों का सबसे अधिक योगदान होता है। ८४-अंश सिद्धान्त के अनुसार शरीर में कुल ८४ अंश माने गए हैं, जिनमें २८ अंश व्यक्ति के अपने भोजन, तप और कर्मों से उपार्जित होते हैं और ५६ अंश पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। इन ५६ पैतृक अंशों में पिता से २१, पितामह से १५ और प्रपितामह से १० अंश मिलते हैं। इन तीनों का योग ४६ अंश है, जो पूर्वजों से प्राप्त ५६ अंशों का बहुत बड़ा भाग है। इसलिए इन तीन पीढ़ियों के प्रति पितृ-ऋण सर्वाधिक माना गया है और इन्हें प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड दिया जाता है।
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