विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र राजा अम्बरीष की प्रार्थना से शांत हुआ। दुर्वासा ऋषि तीनों लोकों में भागकर अंततः अम्बरीष के पास लौटे और उनके चरण पकड़ लिए। अम्बरीष ने उन्हें दोषी मानकर दंड नहीं दिया, बल्कि उनकी पीड़ा देखकर द्रवित हो गए। उन्होंने सुदर्शन चक्र की स्तुति की और अपने जीवन के धर्म, दान, यज्ञ और भगवान-भक्ति को साक्षी रखकर दुर्वासा के कल्याण की प्रार्थना की। अम्बरीष की करुणा और सत्यनिष्ठा से चक्र की ज्वाला शांत हो गई। यह घटना सिद्ध करती है कि भक्त की क्षमा से ही वैष्णव अपराध का ताप शांत होता है।
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