विस्तृत उत्तर
वैष्णव अपराध का अर्थ है भगवान के भक्त का अपमान, अनिष्ट या तिरस्कार करना। अम्बरीष-दुर्वासा कथा में दुर्वासा ऋषि ने राजा अम्बरीष जैसे निष्कपट भक्त का अनिष्ट करना चाहा। उन्होंने कृत्या राक्षसी उत्पन्न कर दी, जबकि अम्बरीष ने केवल धर्मसंकट में जल ग्रहण किया था। इस अपराध के कारण सुदर्शन चक्र दुर्वासा के पीछे पड़ गया। ब्रह्मा, शिव और विष्णु ने भी उन्हें सीधा बचाया नहीं। भगवान ने कहा कि भक्त के प्रति अपराध की क्षमा भक्त से ही माँगनी होगी। इसलिए वैष्णव अपराध को भक्ति मार्ग में अत्यंत गंभीर माना गया है।
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