विस्तृत उत्तर
विष्णु जी ने ब्रह्मचारी रूप में भस्मासुर से अत्यंत मधुर और चतुर वचन कहे। पहले उन्होंने उसकी थकान पूछी और कहा कि शरीर ही धर्म और इच्छाओं का साधन है, इसलिए उसे व्यर्थ कष्ट न दे। फिर उन्होंने उसकी पूरी कथा सुनी। इसके बाद भगवान ने उसके मन में संदेह डालते हुए कहा कि शिव तो श्मशानवासी, भूतनाथ और विचित्र आचरण वाले देव हैं; उनके वरदान पर तुरंत भरोसा क्यों किया जाए। यदि वरदान सच्चा है, तो वह अपने ही सिर पर हाथ रखकर परीक्षा कर ले। इसी वाक्-माया से भस्मासुर स्वयं नष्ट हुआ।
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