विस्तृत उत्तर
वृकासुर कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कन्ध में मिलती है। विशेष रूप से यह अध्याय 88 में आती है, जहाँ शुकदेव जी परीक्षित को शिव और विष्णु भक्तों की भिन्न सांसारिक स्थिति का रहस्य समझाते हैं। उसी उत्तर में वृकासुर का उदाहरण दिया जाता है। वृकासुर ने शिव जी की कठोर तपस्या करके विनाशकारी वरदान पाया और फिर शिव जी पर ही उसका परीक्षण करना चाहा। भगवान विष्णु ने ब्रह्मचारी रूप में उसे भ्रमित किया और वह अपने ही वरदान से भस्म हो गया। इसलिए भागवत में यह कथा दार्शनिक प्रश्न के उत्तर के रूप में आती है।
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