पूजा विधि एवं कर्मकांडशिव जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा हैशिव-पूजा के लिए — सोमवार (शिव का प्रमुख दिन), प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), और महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) सर्वोत्तम हैं। श्रावण मास का समग्र महीना शिव को विशेष प्रिय है।#शिव पूजा दिन#सोमवार शिव#महाशिवरात्रि
पूजा विधि एवं कर्मकांडशिव जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा हैशिव के दो सर्वप्रभावी मंत्र — दैनिक जप के लिए 'ॐ नमः शिवाय' (यजुर्वेद, पंचाक्षरी), और संकट-रोग-भय निवारण के लिए महामृत्युंजय — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्...' (ऋग्वेद)।#शिव मंत्र#महामृत्युंजय मंत्र#पंचाक्षर मंत्र
पूजा विधि एवं कर्मकांडशिव जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैंसबसे बड़ी गलती — शिव को तुलसी चढ़ाना (वर्जित)। अन्य गलतियाँ — शिवलिंग पर सीधे फल रखना, नारियल पानी से अभिषेक, जलाधारी पर दीपक, पूर्व दिशा में मुँह कर जल चढ़ाना, और लाल चंदन।#शिव पूजा गलती#शिवलिंग नियम#पूजा भूल
शिव महिमादक्ष प्रजापति कौन थे और शिव से उनका क्या विवाद था?दक्ष प्रजापति ब्रह्मा के मानस पुत्र और सृष्टि के प्रमुख प्रजापति थे। शिव से उनका विवाद इसलिए था क्योंकि सती ने उनकी इच्छा के विरुद्ध शिव का वरण किया, और एक यज्ञ में शिव के खड़े न होने को दक्ष ने अपना अपमान मानकर शत्रुता मोल ली।#दक्ष प्रजापति#शिव दक्ष विवाद#सती
लोक33 कोटि देवता कौन-कौन से हैं?33 कोटि देवताओं में 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्विनी कुमार हैं। इनके अतिरिक्त अग्नि, वरुण, यम, कुबेर जैसे दिक्पाल भी हैं।#33 कोटि देवता#आदित्य#वसु
शिव मंत्रशिव के कौन से मंत्र बिना दीक्षा के जप सकते हैं?बिना दीक्षा: 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय मंत्र, 'ॐ नमो भगवते रुद्राय', शिव गायत्री, नाम जप (हर हर महादेव, साम्ब सदाशिव)। स्तोत्र (रुद्राष्टक, शिव तांडव) सभी पढ़ सकते हैं। दीक्षा आवश्यक: तांत्रिक बीज मंत्र, अघोर मंत्र, श्मशान साधना मंत्र, गुप्त सिद्धि मंत्र।#बिना दीक्षा#सर्वसुलभ मंत्र#पंचाक्षरी
शिव नामशिव के 108 नामों में से सबसे शक्तिशाली नाम कौन सा है?शास्त्रों में एक नाम 'सबसे शक्तिशाली' घोषित नहीं। प्रमुख: 'शिव' (पंचाक्षर मूल — वेद सार), 'रुद्र' (यजुर्वेद), 'महादेव' (देवों के देव), 'महामृत्युंजय' (ऋग्वेद), 'महाकाल' (समय नियंत्रक)। भक्ति भाव से कोई भी नाम शक्तिशाली।#108 नाम#शक्तिशाली#महादेव
शिव साधनाशिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे कठिन साधना कौन सी है?पाशुपत व्रत (सामाजिक उपहास सहकर शिव ध्यान), अघोर साधना (श्मशान, भय-घृणा विजय), पंचाग्नि तप, 12 वर्षीय अनुष्ठान — ये कठिनतम। परंतु शिव पुराण: शिव 'भोलेनाथ' — एक लोटा जल, बिल्वपत्र और सच्चा भक्तिभाव से प्रसन्न। सबसे कठिन साधना = अहंकार का पूर्ण विनाश।#कठिन साधना#अघोर#पशुपत व्रत
शिव भक्त कथाजलंधर कौन था और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईजलंधर की उत्पत्ति इंद्र के अपमान पर कुपित शिव के तेज से समुद्र में हुई। सिंधु-पुत्र होने से 'जलंधर' नाम पड़ा। शिव-तेज से उत्पन्न होने से देवताओं से शक्तिशाली था। दैत्यराज कालनेमी की पुत्री वृंदा से विवाह हुआ।#जलंधर#शिव तेज#समुद्र
शिव भक्त कथारावण ने शिव के लिए कौन सा स्तोत्र रचा थारावण ने कैलाश दबने पर दर्द की अवस्था में ही 'शिव तांडव स्तोत्र' की रचना की। इसमें 16 श्लोक हैं जो शिव के तांडव, जटा, डमरू और सर्वशक्तिमान स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन करते हैं।#शिव तांडव स्तोत्र#रावण रचित#16 श्लोक
शिव मंदिरवैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा से कौन से रोग दूर होते हैं?वैद्यनाथ = 'वैद्यों के नाथ' — शिव = आदि वैद्य। सभी रोग, विशेषतः असाध्य। रावण कथा — शिव से वैद्य बनने की प्रार्थना। सुल्तानगंज→देवघर कावड़ सबसे प्रसिद्ध। महामृत्युंजय जप। चिकित्सा का विकल्प नहीं।#वैद्यनाथ#ज्योतिर्लिंग#रोग
शिव-सती-पार्वती कथावीरभद्र कौन है और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईवीरभद्र शिव के पहले उग्र रुद्रावतार और गण हैं। सती के आत्मदाह के समाचार पर क्रोधित शिव ने जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंकी — उससे आठ भुजाओं वाले विकराल वीरभद्र प्रकट हुए।#वीरभद्र#शिव अवतार#जटा
शिव महिमात्रिपुरासुर कौन थे और उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?त्रिपुरासुर तारकासुर के तीन पुत्र थे — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। कार्तिकेय द्वारा तारकासुर के वध के बाद इन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और तीन आकाश-नगरों के स्वामी बनकर त्रिपुरासुर कहलाए।#त्रिपुरासुर#तारकासुर पुत्र#तारकाक्ष
शिव पुराण परिचयरुद्र संहिता में कौन-कौन से खंड हैंरुद्र संहिता में 5 खंड हैं — 1. सृष्टि खंड (शिव-महात्म्य) 2. सती खंड (सती विवाह, दक्ष-यज्ञ) 3. पार्वती खंड (पार्वती तपस्या, शिव-विवाह) 4. कुमार खंड (कार्तिकेय जन्म) 5. युद्ध खंड (शंखचूड़ आदि वध)।#रुद्र संहिता#शिव पुराण#सती
शिव लीलागजासुर कौन था?गजासुर महिषासुर का पुत्र और हाथी जैसे रूप का शक्तिशाली दैत्य था। उसने ब्रह्मा की तपस्या से वरदान प्राप्त किया और तीनों लोकों में आतंक मचाया। वह शिव भक्त भी था और अंत में काशी में कृत्तिवासेश्वर ज्योतिर्लिंग बन गया।#गजासुर#महिषासुर पुत्र#हाथी दैत्य
शिव पूजा विधिशिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय प्रमुख मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' (सर्वसुलभ, शिव पुराण)। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (महामृत्युंजय, यजुर्वेद)। 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे...' (रुद्र गायत्री)। तांबे के लोटे से, उत्तर दिशा में मुख करके, छोटी धारा में जल अर्पित करें।#जलाभिषेक#शिवलिंग#मंत्र
दिव्यास्त्रत्रिपुरासुर कौन था और उसका वध कैसे हुआ?त्रिपुरासुर के तीन उड़ते हुए अजेय नगर थे जिन्हें शिव ने पाशुपतास्त्र से एक ही बाण में नष्ट किया। यह इस अस्त्र का सबसे प्राचीन ज्ञात प्रयोग है।#त्रिपुरासुर#पाशुपतास्त्र#शिव
शिव पार्वती विवाहशिव की बारात में कौन-कौन थे?शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, सप्तर्षि, देवता, गंधर्व, यक्ष, नाग, किन्नर, गण, भूत-प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और समस्त जीव-जंतु शामिल थे। यह अब तक की सबसे विचित्र और अद्भुत बारात थी।#शिव बारात#शिव पार्वती विवाह#गण
दिव्यास्त्रमार्कण्डेय कौन थे और उनकी आयु केवल 16 वर्ष क्यों थी?मार्कण्डेय मृकण्डु ऋषि के पुत्र थे। उनके माता-पिता ने गुणवान अल्पायु पुत्र का वरदान चुना था, इसीलिए शिव के वरदान से उनकी आयु केवल 16 वर्ष निश्चित हुई।#मार्कण्डेय#मृकण्डु ऋषि#शिव
शिव लीलाभस्मासुर कौन था?भस्मासुर (वृकासुर) एक शिव-भक्त दैत्य था जिसने शिव को प्रसन्न करने के लिए केदार क्षेत्र में घोर तपस्या की। वरदान पाने के बाद उसने अपने ही आराध्य शिव पर उस वरदान का प्रयोग करने का प्रयास किया।#भस्मासुर#वृकासुर#शिव भक्त
शिव पूजा नियमशिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।#अमावस्या#पूर्णिमा#श्रेष्ठ
तीर्थ स्थलपंचभूत स्थल मंदिर कौन से?पृथ्वी=कांचीपुरम, जल=तिरुवनैक्कावल(त्रिची), अग्नि=तिरुवण्णामलई, वायु=श्रीकालहस्ती, आकाश=चिदंबरम। 5 शिव मंदिर = 5 तत्व = शरीर शुद्धि। दक्षिण तीर्थ।#पंचभूत#5 तत्व#शिव
वरदानविष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।#विष्णु#शिव#वरदान
शिव तत्त्वशिव के तीन रूप कौन से हैं?निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।#शिव के तीन रूप#ब्रह्मा#विष्णु
शिव नामपार्वतीपति और उमापति कौन हैं?पार्वतीपति और उमापति शिव को कहा गया है; उसी स्थान पर उन्हें हिरण्यबाहु और सुवर्णवीर्य भी नमस्कार किया गया है।#पार्वतीपति#उमापति#हिरण्यबाहु
प्रणव रूपप्रणवरूप रुद्र कौन हैं?प्रणवरूप रुद्र अद्वितीय और नाशरहित हैं; स्तुति में अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को भी नमस्कार किया गया है।#प्रणवरूप रुद्र#रुद्र#ओंकार
अघोर कुमारअघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
अघोर महिमाअघोर शिव कौन हैं?अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।#अघोर#शिव#महादेव
महादेव का वरमहादेव ने ब्रह्मा को कौन-कौन से वर दिए?महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया।#महादेव#ब्रह्मा#दिव्य योग
पीतवासा कल्पपीतवासा कल्प में शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?पीतवासा कल्प में शिव पीतवस्त्रधारी महातेजस्वी कुमार और तत्पुरुष महादेव रूप से प्रकट बताए गए हैं।#पीतवासा कल्प#तत्पुरुष#पीतवस्त्रधारी कुमार
तत्पुरुष महिमातत्पुरुष शिव कौन हैं?तत्पुरुष शिव पीतवासा कल्प में पीतवस्त्रधारी परमेश्वर रूप से प्रकट हुए महादेव हैं।#तत्पुरुष#शिव#महादेव
वामदेव रूपरक्तकल्प क्या है और इसमें शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें शिव वामदेव रूप से रक्तवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए।#रक्तकल्प#वामदेव#शिव रूप
वामदेव महिमावामदेव शिव कौन हैं?वामदेव शिव रक्तकल्प में लाल कुमार के रूप में प्रकट हुए परमेश्वर हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने साक्षात् देवेश्वर और ब्रह्मस्वरूप जाना।#वामदेव#शिव#महादेव
सद्योजात शिष्यसद्योजात शिव के चार शिष्य कौन थे?सद्योजात शिव के समीप सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन नामक चार श्वेतवर्ण शिष्य प्रकट हुए।#सद्योजात#चार शिष्य#सुनन्द
सद्योजात महिमासद्योजात शिव कौन हैं?सद्योजात शिव को ब्रह्मा ने श्वेतलोहित कुमार रूप में देखा और साक्षात् परमेश्वर तथा परात्पर ब्रह्म जाना।#सद्योजात#शिव#महेश्वर
श्रद्धा और शिवदर्शनशिव को कौन सा साधन वश में करता है?शिव ने कहा कि वे केवल श्रद्धा से वश में किये जा सकते हैं।#शिव वश#श्रद्धा#भक्ति
शिष्य परम्पराशिव की कृपा से योग में कौन प्रवृत्त हुए?व्यासावतार, योगाचार्यावतार, शिवावतार, चार शिष्य और अनेक प्रशिष्य महेश्वर की कृपा से योग में प्रवृत्त हुए।#शिव कृपा#योग#व्यासावतार
नरक और महादेवमहादेव गुणों के अनुसार कौन-कौन से रूप धारण करते हैं?तमोगुण प्रधान होने पर वे कालरुद्र, रजोगुण प्रधान होने पर ब्रह्मा, सत्त्वगुण प्रधान होने पर विष्णु और गुणरहित होने पर महेश्वर रूप बताए गए हैं।#महादेव#तमोगुण#रजोगुण
पितृ वंशहैमवती गंगा कौन हैं?हैमवती गंगा मेना से उत्पन्न बताई गई हैं और शिवजी के मस्तक पर विराजमान रहने से जगत् को पवित्र करने वाली कही गई हैं।#हैमवती गंगा#मेना#गंगा
शिव तत्त्वप्रलयकाल में नारायण रूप में कौन शयन करते हैं?प्रलयकालीन जलराशि में सदाशिव का ही नारायण रूप में शयन बताया गया है।#प्रलयकाल#नारायण#सदाशिव
गुण और देव रूपकालरुद्र कौन हैं?कालरुद्र वह रूप है जो तमोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।#कालरुद्र#तमोगुण#रुद्र
शिव तत्त्वसदाशिव कौन हैं?सदाशिव जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और अंत के कारण परमात्मा के रूप में वर्णित हैं।#सदाशिव#परमात्मा#शिव तत्त्व
लोकभस्मासुर ने शिव जी से कौन सा वरदान मांगा?भस्मासुर ने वर मांगा कि वह जिसके सिर पर हाथ रखे, वह तुरंत भस्म हो जाए।#भस्मासुर वरदान#शिव#भस्म
लोकभस्मासुर कौन था?भस्मासुर वृकासुर नामक असुर था, जिसे शिव जी से सिर पर हाथ रखते ही किसी को भस्म करने का वरदान मिला था।#भस्मासुर#वृकासुर#शिव
लोकलंबी बीमारी से मृत्यु पर कौन सा श्राद्ध करें?ऐसी मृत्यु के लिए अष्टमी श्राद्ध शुभ है।#लंबी बीमारी#अष्टमी श्राद्ध#रुद्र
लोकरुद्र और आदित्य स्वरूप पितर कौन से फल देते हैं?रुद्र पितर धन, स्वास्थ्य, तेज और रक्षा देते हैं; आदित्य पितर विद्या, ज्ञान-प्रकाश और मोक्ष की दिशा देते हैं।#रुद्र पितर#आदित्य पितर#श्राद्ध फल
लोकयाज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध देवता कौन बताए गए हैं?याज्ञवल्क्य स्मृति में वसु, रुद्र और आदित्य को श्राद्ध देवता बताया गया है।#याज्ञवल्क्य स्मृति#श्राद्ध देवता#वसु
लोकएकादश रुद्र कौन हैं?एकादश रुद्र ११ प्राणिक और संहार-शक्ति से जुड़े देव हैं: कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव।#एकादश रुद्र#रुद्र#प्राण तत्त्व