शिव नामशिव को महायोगी क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को रोग-विकारशून्य अनन्त, शाश्वत, वरिष्ठ, वारिगर्भ और महायोगी महेश्वर कहा गया है।#महायोगी#महेश्वर#अनन्त शिव
शिव नामशिव को गणों का स्वामी क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को गणों का अधिपति कहा गया है और उसी के साथ उन्हें गंधी तथा गुहा से भी गुह्यतम रुद्र कहा गया है।#गणों के अधिपति#रुद्र#गुह्यतम
शिव नामवेदगर्भ और विश्वगर्भ क्या हैं?वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ शिव के नामों के रूप में आए हैं; उन्हें वेदशास्त्ररूप और भुवनेशदेव भी कहा गया है।#वेदगर्भ#विश्वगर्भ#गर्भरूप
शिव रूपशिव के सर्प आभूषण कैसे हैं?शिव को भुजंग कंकण, सर्प बाजूबन्द, सर्प जनेऊ, सर्प कुण्डल, सर्प माला और सर्प कटिसूत्र धारण करने वाला कहा गया है।#सर्प आभूषण#भुजंग#कुण्डल
शिव नामपार्वतीपति और उमापति कौन हैं?पार्वतीपति और उमापति शिव को कहा गया है; उसी स्थान पर उन्हें हिरण्यबाहु और सुवर्णवीर्य भी नमस्कार किया गया है।#पार्वतीपति#उमापति#हिरण्यबाहु
शिव रूपनीलकंठ शिव कैसे हैं?शिव को ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य, चैतन्यरूप, नीलकंठ, नीलकेश और शितिकंठ कहा गया है।#नीलकंठ#शितिकंठ#नीलकेश
शिव रूपअर्धनारीश्वर रूप क्या है?अर्धनारीश्वर रूप में शिव को अर्धनारी का शरीर धारण करने वाला, अव्यक्त और ग्यारह रूपों में परिवर्तित स्थाणु कहा गया है।#अर्धनारीश्वर#अव्यक्त#स्थाणु
प्रणव रूपशिव ओंकार और सर्वज्ञ कैसे हैं?स्तुति में शिव को भगवान्, सर्पों के पति, ओंकार और सर्वज्ञ कहा गया है।#ओंकार#सर्वज्ञ#शिव
मोक्षशिव मोक्ष कैसे देते हैं?शिव को मोक्ष, मोक्षरूप और मोक्ष प्रदान करने वाला कहा गया है; साथ ही वे आत्मास्वरूप, स्वामी और व्यापक शिव हैं।#मोक्ष#मोक्षदाता#मोक्षरूप
सृष्टि-पालन-संहारशिव सृष्टि, पालन, संहार कैसे करते हैं?शिव को जल के मध्य स्थित, ब्रह्मा-विष्णु के मध्य प्रकाशमान, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता और मृत्युस्वरूप ईश्वर कहा गया है।#सृष्टि#पालन#संहार
विश्वव्यापक शिवशिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।#शब्द#स्पर्श#रस
विश्वव्यापक शिवशिव पंचभूतों में कैसे हैं?शिव को जल, वायु, तेज, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त रूप से नमस्कार किया गया है।#पंचभूत#शिव#जल
प्रणव रूपअकार, उकार, मकार क्या हैं?अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।#अकार#उकार#मकार
प्रणव रूपप्रणवरूप रुद्र कौन हैं?प्रणवरूप रुद्र अद्वितीय और नाशरहित हैं; स्तुति में अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को भी नमस्कार किया गया है।#प्रणवरूप रुद्र#रुद्र#ओंकार
विष्णु स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति कैसे की?विष्णु ने शिव को अनेक नामों और रूपों से नमस्कार किया, जैसे प्रणवरूप रुद्र, महादेव, ईशान, लिंग, लिंगी, ओंकार और सर्वज्ञ।#विष्णु#शिव स्तुति#महेश्वर
विष्णु स्तुतिविष्णु स्तुति क्या है?विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
शिव स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति क्यों की?विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को जानकर, उमा-महेश्वर और पाँच मंत्रों का दर्शन पाकर वरदाता ईशान परमेश्वर की स्तुति की।#विष्णु#शिव स्तुति#महादेव
पाँच शिव मंत्रपाँच शिव मंत्रों का क्या महत्व बताया गया है?इन पाँच मंत्रों को शिव के अंगों से जोड़ा गया है: ईशान मुकुट, तत्पुरुष मुख, अघोर हृदय, वामदेव गुह्यस्थान और सद्योजात चरण।#पाँच शिव मंत्र#ईशान#तत्पुरुष
पाँच शिव मंत्रवामदेव मंत्र क्या है?वामदेव मंत्र सामवेद से उत्पन्न, रक्तवर्ण, तेरह कलाओं से युक्त और छाछठ अक्षरों वाला बताया गया है।#वामदेव मंत्र#सामवेद#रक्तवर्ण
पाँच शिव मंत्रसद्योजात मंत्र क्या है?सद्योजात मंत्र यजुर्वेद से उत्पन्न, आठ कलाओं वाला, श्वेतवर्ण, शान्तिकारक और पैंतीस अक्षरों से युक्त बताया गया है।#सद्योजात मंत्र#यजुर्वेद#श्वेतवर्ण
पाँच शिव मंत्रअघोर मंत्र क्या है?अघोर मंत्र अथर्ववेद से उत्पन्न, आठ कलाओं से युक्त, तैंतीस अक्षरों वाला और कृष्णवर्ण बताया गया है।#अघोर मंत्र#अथर्ववेद#आठ कला
पाँच शिव मंत्रतत्पुरुष मंत्र क्या है?तत्पुरुष मंत्र गायत्री से उत्पन्न, चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त और हरित वर्ण का बताया गया है।#तत्पुरुष मंत्र#गायत्री#चार कला
पाँच शिव मंत्रईशान मंत्र क्या है?ईशान मंत्र ओंकार से उत्पन्न, पाँच कलाओं वाला, बुद्धिविवर्धक, धर्म-अर्थ सिद्ध करने वाला और शुद्ध स्फटिक जैसा शुभ्र बताया गया है।#ईशान मंत्र#ओंकार#पाँच कला
शब्दमय शिवअक्षरों से शिव का शरीर कैसे बताया गया है?अक्षरों से शिव के अंग बताए गए हैं: अकार मस्तक, आकार ललाट, इकार-ईकार नेत्र, मकार हृदय, हकार आत्मा और क्षकार क्रोध कहा गया है।#अक्षर शरीर#शिव#वर्णमाला
शब्दमय शिवशब्दमय शिव रूप क्या है?वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।#शब्दमय शिव#महेश्वर#लिंग
त्रिदेव और ओम्ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
प्रणव ओम्प्रणव ओम् को ब्रह्म क्यों कहा गया है?प्रणव ओम् को रुद्र, परम कारण, सत्य-आनन्द, अमृतरूप परम ब्रह्म और सृष्टिकर्ता लिंगरूप प्रणव का वाचक बताया गया है।#प्रणव#ओम्#ब्रह्म
प्रणव ओम्अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#अकार#उकार#मकार
अघोर मंत्रअघोर मंत्र का रोज जप क्यों करें?सभी पापों से मुक्ति के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अघोर मंत्र का नित्य जप करने के लिए कहा गया है।#अघोर मंत्र#नित्य जप#द्विज
शिव स्नानशिव स्नान की विधि क्या है?अघोर मंत्र जपते हुए आठ द्रोण घी से देवेश शिव को स्नान कराकर बाद में शुद्ध जल से स्नान कराने का विधान है।#शिव स्नान#घी स्नान#अघोर मंत्र
अघोर मंत्रअघोर मंत्र क्यों जपा जाता है?अघोर मंत्र सभी प्रकार के पातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक और अनेक पापों की शुद्धि के लिए जपा जाता है।#अघोर मंत्र#अघोरेश्वर#शिव
अघोर फलअघोर शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?योग के द्वारा महादेव का ध्यान करने वाले मनीषी अविनाशी भगवान् रुद्र के दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।#अघोर ध्यान#महादेव#योग
शिवस्थानशिव का निर्विकार और निर्गुण स्थान क्या बताया गया है?शिव का स्थान महेश्वर का निर्विकार, निर्गुण, विश्वरूप और ऐश्वर्यमय स्थान बताया गया है।#निर्विकार#निर्गुण#विश्वरूप
अघोर कुमारअघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
अघोर दर्शनअघोर शिव ने ब्रह्मा को दर्शन कैसे दिया?ब्रह्मा ने ध्यान और शरणागति से अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर ध्यान किया, तब अघोर महादेव ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया।#अघोर दर्शन#ब्रह्मा#ध्यान
अघोर उपासनाप्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।#प्राणायाम#ध्यान#उपासना
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।#ब्रह्मा#अघोर#शरणागति
अघोर रूपअघोर शिव का रूप कैसा बताया गया है?अघोर शिव का रूप कृष्णवर्ण, तेजस्वी, कृष्ण वस्त्र-पगड़ी, कृष्ण मुकुट, यज्ञोपवीत और कृष्ण अंगराग से युक्त बताया गया है।#अघोर रूप#कृष्णवर्ण#कृष्ण वस्त्र
अघोर महिमाअघोर शिव कौन हैं?अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।#अघोर#शिव#महादेव
तत्पुरुष फलमहादेव में प्रविष्ट होने का क्या अर्थ बताया गया है?महादेव में प्रविष्ट होना पापमुक्त, शुद्धात्मा और ब्रह्मतेजसम्पन्न होकर पुनर्भव के बंधन से छूटने से जुड़ा है।#महादेव में प्रविष्ट#पुनर्भव मुक्ति#शिवप्राप्ति
महादेव का वरमहादेव ने ब्रह्मा को कौन-कौन से वर दिए?महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया।#महादेव#ब्रह्मा#दिव्य योग
महेश्वरी धेनुरुद्राणी किसे कहा गया है?महादेव ने महेश्वरी धेनु से कहा कि तुम रुद्राणी होगी और ब्राह्मणों के कल्याण के लिये परमार्थसाधिका बनोगी।#रुद्राणी#महेश्वरी धेनु#महादेव
महेश्वरी धेनुमति, बुद्धि और स्मृति का संबंध महेश्वरी गाय से कैसे बताया गया है?महादेव ने उस महेश्वरी धेनु की महिमा गाते हुए कहा कि तुम मति हो, बुद्धि हो और स्मृति हो।#मति#बुद्धि#स्मृति
पीतवासा कल्पपीतवासा कल्प में शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?पीतवासा कल्प में शिव पीतवस्त्रधारी महातेजस्वी कुमार और तत्पुरुष महादेव रूप से प्रकट बताए गए हैं।#पीतवासा कल्प#तत्पुरुष#पीतवस्त्रधारी कुमार
तत्पुरुष रूपशिव का पीला रूप कैसा बताया गया है?शिव का पीला रूप पीतवस्त्र, पीत माला, पीत गन्ध, पीली पगड़ी और हेमवर्ण यज्ञोपवीत से सुशोभित बताया गया है।#पीला रूप#पीतवस्त्र#पीत माला
तत्पुरुष महिमातत्पुरुष शिव कौन हैं?तत्पुरुष शिव पीतवासा कल्प में पीतवस्त्रधारी परमेश्वर रूप से प्रकट हुए महादेव हैं।#तत्पुरुष#शिव#महादेव
वामदेव फलवामदेव शिव की भक्ति से पाप कैसे दूर होते हैं?परमेश्वरपरायण होकर समाधि से वामदेव का ध्यान करने वाले भक्त विमल आत्मा और ब्रह्मनिष्ठ होकर पाप से छूटते हैं।#वामदेव भक्ति#पाप मुक्ति#समाधि
वामदेव फलवामदेव शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?वामदेव शिव का समाधि से ध्यान करने वाले भक्त पाप से छूटकर रुद्रलोक प्राप्त करते हैं।#वामदेव ध्यान#शिव भक्ति#पाप मुक्ति
ब्रह्मा और वामदेववामदेव शिव ने ब्रह्मा को क्या वर दिया?वामदेव शिव ने ब्रह्मा से कहा कि वे ध्यानबल से कल्प-कल्प में उन्हें सर्वश्रेष्ठ और लोकाधार परमेश्वर रूप में जानेंगे।#वामदेव#ब्रह्मा#वर
वामदेव स्तुतिवामदेव शिव की स्तुति कैसे की गई?ब्रह्मा ने परम भक्ति से ब्रह्म अर्थात् वामदेवाय मन्त्र को पूर्व में लगाकर अनेक स्तुतियों से वामदेव शिव का स्तवन किया।#वामदेव स्तुति#ब्रह्मा#वामदेवाय मंत्र