ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

यमलोक से जुड़े सभी प्रश्न(89)

यमलोक पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 89 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पौराणिक ज्ञान

गरुड़ पुराण में यमलोक यात्रा का विवरण?

मृत्यु→यमदूत→सूक्ष्म शरीर→86,000 योजन कठिन मार्ग→वैतरणी नदी (गो-दान से पार)→यमराज दरबार→चित्रगुप्त कर्म लेखा→स्वर्ग/नर्क/पुनर्जन्म। 10 दिन यात्रा = दशगात्र अनुष्ठान।

#गरुड़ पुराण#यमलोक#आत्मा यात्रा
लोक

गरुड़ पुराण में पापियों के यमलोक मार्ग का वर्णन कैसे है?

गरुड़ पुराण में पापियों का 86,000 योजन का यमलोक मार्ग अत्यंत भयंकर है — जलती रेत, वैतरणी नदी, यमदूतों के कोड़े। पुण्यात्मा के लिए यही मार्ग सुलभ हो जाता है।

#गरुड़ पुराण#पापी#यमलोक
दिव्यास्त्र

रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?

अपने बल के अहंकार में रावण ने यमलोक पर आक्रमण कर दिया। इसी कारण यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ।

#रावण#यमराज#युद्ध
दिव्यास्त्र

यमलोक में चित्रगुप्त की क्या भूमिका है?

चित्रगुप्त यमलोक में आत्मा के जीवन भर के कर्मों का लेखा-जोखा यमराज के सामने प्रस्तुत करते हैं। इसी आधार पर यमराज स्वर्ग या नरक का निर्णय सुनाते हैं।

#चित्रगुप्त#यमलोक#कर्म
दिव्यास्त्र

मृत्यु के बाद पापी आत्मा को क्या भोगना पड़ता है?

पापी आत्मा को यमदूत शरीर से खींचते हैं, गर्म रेत-नुकीले पत्थरों के कष्टदायक मार्ग से यमलोक ले जाते हैं, फिर कर्मों के आधार पर यमराज नरक का दण्ड देते हैं।

#पापी आत्मा#यमलोक#यमदूत
लोक

इन्द्रसेन के पिता यमलोक में क्यों थे?

पूर्व पाप या व्रत-भंग के कारण।

#इन्द्रसेन पिता#यमलोक#व्रत भंग
लोक

नारद जी ने इन्द्रसेन को क्या बताया?

उनके पिता को इन्दिरा एकादशी व्रत चाहिए।

#नारद#इन्द्रसेन#यमलोक
श्राद्ध विधि

दक्षिण दिशा में मुख क्यों करते हैं?

दक्षिण दिशा में मुख इसलिए करते हैं क्योंकि शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है। साथ ही पितर भी वायु पुराण के अनुसार दक्षिण दिशा से ही चंद्रलोक के माध्यम से वायु रूप में आते हैं, इसलिए पितरों से सीधा संपर्क इसी दिशा से होता है।

#दक्षिण दिशा कारण#यमलोक#पितृलोक
पितृ पक्ष

पितर किस दिशा से घर आते हैं?

पितर 'दक्षिण दिशा' से अपने वंशजों के घर आते हैं। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है। यही कारण है कि श्राद्ध करते समय भी दक्षिण की ओर मुख रखा जाता है। वायु पुराण का दर्शन।

#पितर दिशा#दक्षिण दिशा#यमलोक
लोक

यमलोक और कर्म-विपाक से जीवन को क्या सीख मिलती है?

यमलोक सिखाता है कि कोई कर्म छिपता नहीं; पाप का फल नरक, योनियों और रोगों में मिलता है, जबकि धर्म और भक्ति श्रेष्ठ गति देते हैं।

#यमलोक#कर्म विपाक#जीवन शिक्षा
लोक

श्रीमद्भागवत पुराण में कितने नरक बताए गए हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण में २८ प्रमुख नरकों का वर्णन है, जहाँ पापों के अनुसार दंड मिलता है।

#श्रीमद्भागवत पुराण#28 नरक#नरक
लोक

यमपुरी के द्वार कर्मों के आधार पर कैसे मिलते हैं?

यमपुरी में प्रवेश पाप, दान, सत्य, पितृसेवा, अहिंसा और योग-ज्ञान जैसे कर्मों के आधार पर अलग-अलग द्वारों से होता है।

#यमपुरी द्वार#कर्म#पुण्य
लोक

यमपुरी का उत्तर द्वार क्यों श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर द्वार सत्यवादियों, पितृभक्तों और अहिंसा पालन करने वालों के लिए है, इसलिए इसे उत्तम माना गया है।

#यमपुरी उत्तर द्वार#सत्यवादी#पितृभक्त
लोक

यमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?

दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।

#यमपुरी दक्षिण द्वार#पापी आत्मा#यमलोक
लोक

यमपुरी के चार द्वार कौन-कौन से हैं?

यमपुरी के चार द्वार हैं: दक्षिण द्वार, पश्चिम द्वार, उत्तर द्वार और पूर्व द्वार। प्रवेश कर्मों के आधार पर होता है।

#यमपुरी#चार द्वार#यमलोक
लोक

पुण्यात्माओं को पुष्पोदका नदी क्यों मिलती है?

दान-पुण्य और धर्म का पालन करने वाली आत्माओं को वैतरणी के स्थान पर शीतल पुष्पोदका नदी मिलती है।

#पुण्यात्मा#पुष्पोदका#दान पुण्य
लोक

पुष्पोदका नदी क्या है?

पुष्पोदका पुण्यात्माओं के मार्ग की निर्मल, शीतल और कमल-युक्त नदी है, जिसके किनारे उन्हें विश्राम और तर्पण मिलता है।

#पुष्पोदका नदी#पुण्यात्मा#यमलोक
लोक

पापी आत्मा वैतरणी नदी कैसे पार करती है?

बिना गोदान वाली पापी आत्मा वैतरणी में डूबती-उतराती है और यमदूत उसे त्रिशूलों से नदी में धकेलते हैं।

#पापी आत्मा#वैतरणी#यमदूत
लोक

वैतरणी नदी पार करने में गोदान कैसे सहायक होता है?

गोदान करने वाला जीव वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट पार कर सकता है।

#गोदान#वैतरणी नदी#यमलोक
लोक

वैतरणी नदी में क्या बहता है?

वैतरणी नदी में जल नहीं, बल्कि उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

#वैतरणी नदी#रक्त#पीब
लोक

वैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?

वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।

#वैतरणी नदी#भयानक नदी#यमलोक
लोक

वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

#वैतरणी नदी#यमलोक#गरुड़ पुराण
लोक

आत्मा यमलोक तक कितने दिनों में पहुँचती है?

आत्मा यमलोक तक ३४८ दिनों में पहुँचती है और प्रतिदिन लगभग २००.५ योजन चलती है।

#आत्मा यात्रा#यमलोक#348 दिन
लोक

यममार्ग की दूरी 86,000 योजन क्यों बताई गई है?

गरुड़ पुराण में मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन बताई गई है, इसलिए यममार्ग इतना लंबा माना गया है।

#यममार्ग दूरी#86000 योजन#गरुड़ पुराण
लोक

यममार्ग क्या है?

यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।

#यममार्ग#यमलोक#गरुड़ पुराण
लोक

यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा में क्यों ले जाते हैं?

यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में है, इसलिए यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा के यममार्ग से ले जाते हैं।

#यमदूत#दक्षिण दिशा#यममार्ग
लोक

यातना-देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना-देह इसलिए नष्ट नहीं होती क्योंकि वह नरक के कष्ट भोगने के लिए बनी है; आग और शस्त्र उसे समाप्त नहीं करते।

#यातना देह#नरक यातना#सूक्ष्म शरीर
लोक

यातना-देह क्या है?

यातना-देह वह सूक्ष्म शरीर है जिससे आत्मा नरक की यातनाएँ भोगती है, पर वह आग या शस्त्र से नष्ट नहीं होती।

#यातना देह#सूक्ष्म शरीर#नरक
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

#यमदूत#यमराज#मृत्यु
लोक

श्रवण और श्रवणी कर्म-साक्षी क्यों माने गए हैं?

श्रवण-श्रवणी हर गुप्त कर्म को देखते-सुनते और यमराज के सामने प्रमाण देते हैं, इसलिए वे कर्म-साक्षी हैं।

#श्रवण श्रवणी#कर्म साक्षी#यमलोक
लोक

श्रवण देवों की पूजा करने से मृत्यु के समय क्या लाभ होता है?

सत्य, दान-पुण्य और श्रवण देवों की पूजा करने वाले पर वे प्रसन्न होते हैं और मृत्यु के समय कष्ट नहीं होने देते।

#श्रवण देव पूजा#मृत्यु समय#दान पुण्य
लोक

यमराज के सामने श्रवण देव गवाह कैसे बनते हैं?

यदि आत्मा पाप नकारती है, तो श्रवण-श्रवणी देव यमराज के सामने प्रत्यक्ष गवाह बनकर उसके कर्मों का प्रमाण देते हैं।

#श्रवण देव#यमराज#गवाह
लोक

बंद कमरे में किए गए कर्म भी यमलोक तक कैसे पहुँचते हैं?

श्रवण और श्रवणी देव बंद कमरे, अंधकार और एकांत में किए गए कर्म भी देख-सुनकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

#गुप्त कर्म#श्रवण देव#श्रवणी
लोक

श्रवण और श्रवणी चित्रगुप्त की सहायता कैसे करते हैं?

श्रवण-श्रवणी हर कर्म को देखकर-सुनकर चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुँचाते हैं और यमराज के सामने गवाह बनते हैं।

#श्रवण श्रवणी#चित्रगुप्त#कर्म लेखा
लोक

श्रवण देव गुप्त कर्मों को कैसे जानते हैं?

श्रवण देव ब्रह्मा के कानों और नेत्रों के प्रतीक हैं, इसलिए वे गुप्त से गुप्त कर्म भी देख-सुन लेते हैं।

#श्रवण देव#गुप्त कर्म#कर्म साक्षी
लोक

श्रवणी देवियाँ किसके कर्मों को देखती हैं?

श्रवणी देवियाँ स्त्रियों के सभी शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म अवलोकन करती हैं।

#श्रवणी देवियाँ#स्त्री कर्म#यमलोक
लोक

श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

#श्रवण देव#उत्पत्ति#ब्रह्मा
लोक

श्रवण और श्रवणी देव कौन हैं?

श्रवण और श्रवणी यमलोक के दिव्य गुप्तचर हैं, जो पुरुषों और स्त्रियों के शुभ-अशुभ कर्मों को देखते-सुनते हैं।

#श्रवण देव#श्रवणी#यमलोक
लोक

यमलोक में चित्रगुप्त का न्याय अंतिम क्यों माना जाता है?

चित्रगुप्त का कर्म-लेखा अकाट्य साक्ष्य है, इसलिए यमलोक में उनका न्याय अंतिम माना जाता है।

#चित्रगुप्त न्याय#यमलोक#अंतिम साक्ष्य
लोक

चित्रगुप्त के लेखे से कोई जीव बच क्यों नहीं सकता?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका और श्रवण-श्रवणी की गवाही के कारण कोई जीव अपने कर्मों से बच नहीं सकता।

#चित्रगुप्त लेखा#कर्म साक्ष्य#अग्रसंधानी
लोक

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका क्या है?

अग्रसंधानी चित्रगुप्त की दिव्य कर्म-पुस्तिका है, जिसमें हर जीव के जन्म से मृत्यु तक के कर्म दर्ज रहते हैं।

#अग्रसंधानी#चित्रगुप्त#कर्म पुस्तिका
लोक

चित्रगुप्त का नाम चित्रगुप्त क्यों पड़ा?

वे गुप्त रूप से सभी जीवों के कर्म-चित्र संचित करते हैं, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।

#चित्रगुप्त नाम#कर्म चित्र#गुप्त लेखा
लोक

चित्रगुप्त को कायस्थ क्यों कहा जाता है?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए, इसलिए उन्हें कायस्थ कहा जाता है।

#चित्रगुप्त#कायस्थ#ब्रह्मा काया
लोक

चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त यमलोक के कर्म-अभिलेखक हैं, जो हर जीव के शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म लेखा रखते हैं।

#चित्रगुप्त#यमलोक#कर्म लेखा
लोक

यमराज की सभा को पारलौकिक न्यायालय क्यों कहा गया है?

यमराज की सभा में हर कर्म का अकाट्य लेखा प्रस्तुत होता है, इसलिए इसे पारलौकिक न्यायालय कहा गया है।

#पारलौकिक न्यायालय#यमराज सभा#चित्रगुप्त
लोक

यमराज की सभा में कर्मों का मूल्यांकन कैसे होता है?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका में दर्ज कर्मों के आधार पर यमराज की सभा में जीवात्मा का मूल्यांकन होता है।

#कर्म मूल्यांकन#यमराज सभा#चित्रगुप्त
लोक

यमराज की सभा में गंधर्व और अप्सराएँ क्या करते हैं?

यमराज के सिंहासन पर आसीन होने पर गंधर्व उनका यशोगान करते हैं और अप्सराएँ नृत्य करती हैं।

#गंधर्व#अप्सरा#यमराज सभा
लोक

यमराज की सभा में पुण्यात्माओं का स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्मा के आने पर धर्मराज स्वयं आसन से उठकर स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक सभा में स्थान देते हैं।

#पुण्यात्मा#यमराज सभा#धर्मराज
लोक

यमराज की सभा में कौन-कौन उपस्थित रहते हैं?

यमराज की सभा में मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवता, अप्सराएँ और अग्निष्वात्त आदि पितृगण उपस्थित रहते हैं।

#यमराज सभा#पितृगण#गंधर्व
लोक

यमराज का दरबार डरावना है या दिव्य?

यमराज का दरबार मूलतः दिव्य और भव्य है, पर पापी आत्मा के लिए वह भय और दंड का स्थान बन जाता है।

#यमराज दरबार#यमलोक#दिव्य सभा
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।