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विस्तृत उत्तर
पुराणों में वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहा गया है और इसे युगादि तिथि माना गया है। तृतीया तिथि की इसी अक्षय ऊर्जा के कारण पितृ पक्ष की तृतीया पर किया गया श्राद्ध अक्षय फलदायी माना गया है।
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