विस्तृत उत्तर
अम्बरीष को सुदर्शन चक्र इसलिए मिला क्योंकि वे भगवान विष्णु के अनन्य और निष्काम भक्त थे। उन्होंने अपना राज्य, धन, शरीर, मन और इंद्रियाँ भगवान की सेवा में अर्पित कर दी थीं। वे ऐश्वर्य में रहते हुए भी वैराग्यवान थे और युक्त-वैराग्य का पालन करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने अपने प्रिय अस्त्र सुदर्शन चक्र को उनकी रक्षा के लिए नियुक्त किया। यह कोई सामान्य वरदान नहीं था, बल्कि भक्त और भगवान के गहरे संबंध का प्रमाण था। जब दुर्वासा ने अम्बरीष को मारना चाहा, तब यही चक्र उनकी रक्षा के लिए प्रकट हुआ।
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