विस्तृत उत्तर
अम्बरीष ने दुर्वासा को सुदर्शन चक्र की स्तुति करके बचाया। जब दुर्वासा भयभीत होकर उनके चरणों में गिरे, तब अम्बरीष को उनसे क्रोध नहीं आया। वे उलटे लज्जित और दुखी हुए कि महान ऋषि उनके कारण कष्ट पा रहे हैं। उन्होंने हाथ जोड़कर सुदर्शन चक्र से प्रार्थना की कि यदि उन्होंने जीवन में सच्चा धर्म, दान, यज्ञ और भगवान की भक्ति की है, तो दुर्वासा की जलन शांत हो जाए। अम्बरीष की करुणा और सत्य-संकल्प से सुदर्शन चक्र शांत हुआ और दुर्वासा बच गए।
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