विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने स्त्री-वध का पाप या उसका परिणाम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उनका निर्णय लोक-रक्षा के लिए था, निजी स्वार्थ के लिए नहीं। काव्या माता एक तपस्विनी और ऋषिपत्नी थीं, इसलिए उनका वध सामान्य धर्म के अनुसार अत्यंत गंभीर था। फिर भी उनके तपोबल से इंद्र और देव-व्यवस्था पर तत्काल संकट था। विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाकर संकट टाल दिया, पर वे यह भी जानते थे कि इस कर्म की नैतिक प्रतिक्रिया होगी। भृगु ऋषि के श्राप को स्वीकार कर उन्होंने यह दिखाया कि धर्मरक्षक को अपने कठिन निर्णयों का भार भी स्वयं उठाना पड़ता है।
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