विस्तृत उत्तर
भृगु ऋषि ने अपनी पत्नी को तपोबल, सत्य-संकल्प और मंत्र-सिद्ध जल की शक्ति से जीवित किया। पुराणिक परंपरा में ऋषियों की शक्ति केवल मंत्र-जप से नहीं, बल्कि सत्य, ब्रह्मचर्य, तप और धर्मनिष्ठ जीवन से उत्पन्न होती है। भृगु ने यही आधार लेकर संकल्प किया कि यदि उनका वेदाध्ययन और धर्माचरण सत्य है, तो काव्या माता जीवित हों। उन्होंने जल छिड़का और काव्या माता में प्राण लौट आए। यह प्रसंग बताता है कि ऋषि की वाणी और संकल्प तभी सिद्ध होते हैं जब उनके पीछे जीवन भर का सत्य और तप हो।
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