विस्तृत उत्तर
भृगु ऋषि के श्राप की संख्या को लेकर परंपराओं में भिन्नता मिलती है। मत्स्य पुराण और पद्म पुराण जैसे संदर्भों में भगवान विष्णु को पृथ्वी पर सात बार जन्म लेने का श्राप कहा गया है। दूसरी ओर लोककथाओं और दशावतार-प्रधान व्याख्याओं में यही प्रसंग विष्णु के बार-बार अवतार लेने की पृष्ठभूमि के रूप में समझाया जाता है। इसलिए इसे 'सात जन्म' और 'दशावतार' दोनों ढंग से सुनाया जाता है। मूल भाव यह है कि भगवान विष्णु ने लोककल्याण के लिए मानव जन्म, दुःख और पत्नी-वियोग को स्वीकार किया।
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