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विस्तृत उत्तर
दन्तवक्र का पूर्व जन्म जय-विजय कथा में वैकुण्ठ द्वारपाल विजय से जुड़ा है। विजय पहले हिरण्याक्ष, फिर कुम्भकर्ण और अंत में दन्तवक्र के रूप में जन्मा। यह तीसरा जन्म द्वापर युग में हुआ, जिसमें उसने कृष्ण से शत्रुता रखी। दन्तवक्र ने शिशुपाल की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए कृष्ण से युद्ध किया। कृष्ण के हाथों वध होने पर विजय का श्राप पूरा हुआ और वह पुनः वैकुण्ठ लौटने योग्य हुआ।
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