विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ऋषि अम्बरीष पर इसलिए क्रोधित हुए क्योंकि उन्हें लगा कि राजा ने अतिथि का अपमान किया है। दुर्वासा ने भोजन का निमंत्रण स्वीकार किया था और स्नान के लिए गए थे। द्वादशी पारण का समय समाप्त हो रहा था, इसलिए ब्राह्मणों की सलाह पर अम्बरीष ने केवल जल ग्रहण किया। उन्होंने अन्न नहीं खाया, बल्कि अतिथि की प्रतीक्षा करते रहे। पर दुर्वासा ने अपनी योगदृष्टि से जल-पान जान लिया और इसे अपने भोजन से पहले राजा का भोजन करना मान लिया। क्रोध में उन्होंने अम्बरीष को पाखंडी कहा और कृत्या उत्पन्न कर दी।
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