विस्तृत उत्तर
हंस अवतार अज्ञान का नाश करने और आत्मज्ञान देने के लिए हुआ। सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने जीवों को भौतिक जगत में कर्मफल भोगने हेतु अविद्या के आवरण में बाँधा। बाद में सनकादिक मुनियों ने पूछा कि मन और विषयों का गहरा संबंध कैसे टूटे। यह प्रश्न मोक्ष का मूल प्रश्न था। ब्रह्मा जी स्वयं रजोगुणी सृष्टि-कर्म में आच्छादित होने के कारण समाधान नहीं दे सके। तब उन्होंने भगवान विष्णु को स्मरण किया। भगवान हंस रूप में प्रकट हुए और बताया कि आत्मा शरीर, मन और विषयों से अलग साक्षी है। इस ज्ञान से अज्ञान का अंधकार मिटता है।
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