विस्तृत उत्तर
जालंधर का वध भगवान शिव ने किया। यद्यपि जालंधर शिव की क्रोधाग्नि से उत्पन्न था, पर वह अहंकार और अधर्म के मार्ग पर चला गया। वृंदा के सतीत्व के कारण वह लंबे समय तक अजेय रहा। देवता, इंद्र और विष्णु भी उसे नहीं मार सके। जब विष्णु की योगमाया से वृंदा का पतिव्रत कवच टूट गया, तब जालंधर की सुरक्षा समाप्त हो गई। युद्धभूमि में भगवान शिव ने अपने रौद्र रूप में चक्र या त्रिशूल से प्रहार किया और उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया। उसका दिव्य तेज अंततः शिव में ही विलीन हो गया।
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