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विस्तृत उत्तर
जनलोक को हृदय से ऊपर और कंठ के स्थान पर बताया गया है। कंठ योगशास्त्र के अनुसार विशुद्ध चक्र का स्थान है। जनलोक विशुद्ध ज्ञान, उच्च बौद्धिकता, पूर्ण वैराग्य और सात्त्विक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। यहाँ रहने वाले सिद्ध पुरुष वाणी के माध्यम से केवल परब्रह्म का गुणगान और वेद-मंत्रों का उद्घोष करते हैं, इसलिए इस लोक का संबंध विराट पुरुष के कंठ और मुख से बताया गया है।
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