📖
विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में पिण्डदान के समय कुश पर जो अन्न का लेप, कण या पोंछन रह जाता है, वह लेपभाज पितरों का भाग माना गया है। चौथी, पाँचवीं और छठी पीढ़ी के पितर इसी सूक्ष्म अन्न-लेप से तृप्त होते हैं। यह पितृ संबंध की सूक्ष्म अवस्था को दर्शाता है, जहाँ पूर्ण पिण्ड के स्थान पर अन्न का अवशिष्ट लेप भी पारलौकिक तृप्ति का साधन बनता है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?




