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विस्तृत उत्तर
मधु और कैटभ का जन्म तो विष्णु के कर्णमल से हुआ, लेकिन उनमें रजोगुण और तमोगुण की तीव्र प्रवृत्तियाँ जाग्रत हो गईं। शुरुआत में वे अपनी उत्पत्ति और आधार के बारे में सोचते हैं, फिर वाग्बीज मंत्र सुनकर महाशक्ति की तपस्या करते हैं। तपस्या से शक्ति प्राप्त करने के बाद उनमें विनम्रता के बजाय अहंकार बढ़ गया। इच्छा-मृत्यु का वरदान पाकर वे स्वयं को अजेय मानने लगे और ब्रह्मा जी को चुनौती देकर वेदों का अपहरण कर लिया। इसी अहंकार, अज्ञान और धर्म-विरोधी आचरण के कारण वे असुर कहलाए।
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