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विस्तृत उत्तर
कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने मधु और कैटभ का वध किया, तब उनके विशाल शरीरों से अत्यधिक मेद निकला। महाप्रलय के कारण चारों ओर जल ही जल था, इसलिए वह मेद जल में फैलने लगा। भगवान की इच्छा से वह मेद जमकर ठोस धरातल में बदल गया। यही स्थिर भूमि आगे चलकर पृथ्वी या मेदिनी कहलायी। यह वर्णन पौराणिक भाषा में बताता है कि विनाश के बाद ही निर्माण का नया आधार बनता है। तमस और रजस के असुर-विकार जब नियंत्रित होते हैं, तो वही शक्ति सृष्टि के पोषण में लगती है।
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