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विस्तृत उत्तर
मधु कैटभ के शरीर से पृथ्वी बनने की कथा में बताया गया है कि उनके वध के बाद उनके शरीरों से निकला मेद और कठोर अंग सृष्टि के स्थूल आधार में बदल गए। मेद प्रलय-जल पर फैलकर जम गया और उसने भूमि का रूप लिया। उनकी कठोर हड्डियाँ पर्वतों और शिखरों के रूप में मानी गईं। इस तरह असुरों का शरीर विनाश के बाद भी व्यर्थ नहीं गया, बल्कि सृष्टि के निर्माण में प्रयुक्त हुआ। यह पौराणिक प्रतीक बताता है कि ईश्वर अधर्म के विनाश को भी जगत के कल्याण में बदल देते हैं।
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