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विस्तृत उत्तर
कथा के अनुसार मधु और कैटभ के शरीर अत्यंत विशाल और पर्वतों जैसे कठोर थे। जब भगवान विष्णु ने उनका वध किया, तो उनके शरीर से मेद जल में फैल गया और हड्डियाँ इधर-उधर बिखर गईं। कालांतर में वही कठोर अस्थियाँ पर्वतों, शिखरों और ऊँचे भूभागों के रूप में प्रकट हुईं। यह वर्णन भौगोलिक तथ्य नहीं, बल्कि पौराणिक प्रतीक है। इसके माध्यम से बताया गया है कि सृष्टि का स्थूल और कठोर आधार भी किसी बड़े ब्रह्मांडीय परिवर्तन और संहार के बाद ही बनता है।
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