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विस्तृत उत्तर
मधु और कैटभ को इच्छा-मृत्यु उनकी कठोर तपस्या से मिली। जन्म के बाद वे अपनी उत्पत्ति का रहस्य जानना चाहते थे और तभी उन्होंने वाग्बीज मंत्र की दिव्य ध्वनि सुनी। दोनों ने उसी मंत्र का जप करते हुए एक हजार वर्षों तक अन्न-जल त्यागकर तपस्या की। उनकी एकाग्रता और तप से प्रसन्न होकर महामाया ने उन्हें वरदान देने की इच्छा जताई। तब दोनों ने वर मांगा कि वे तभी मरें जब वे स्वयं मृत्यु स्वीकार करें। देवी ने तथास्तु कहा और उन्हें इच्छा-मृत्यु प्राप्त हुई।
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