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विस्तृत उत्तर
महामाया ने मधु और कैटभ को इच्छा-मृत्यु का वरदान दिया। इसका अर्थ था कि वे तब तक नहीं मारे जा सकते थे जब तक वे स्वयं अपनी मृत्यु स्वीकार न करें। यह वरदान बहुत शक्तिशाली था, क्योंकि इससे देवता, दानव या कोई भी शक्ति उन्हें सीधे नहीं मार सकती थी। वरदान मिलने के बाद दोनों के भीतर अहंकार बढ़ गया और वे स्वयं को अजेय समझने लगे। अंत में भगवान विष्णु ने महामाया की सहायता से उन्हें ऐसा मोहग्रस्त किया कि उन्होंने स्वयं विष्णु को अपनी मृत्यु का वरदान दे दिया।
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