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विस्तृत उत्तर
नीलकंठ नाम भगवान शिव को समुद्र मंथन की घटना के बाद मिला। जब हलाहल विष निकला और सृष्टि जलने लगी, तब शिव जी ने लोककल्याण के लिए वह विष पी लिया। माता पार्वती ने उसे पेट में जाने से रोक दिया, इसलिए विष शिव के गले में ही ठहर गया। उस विष की तीव्रता से उनका कंठ नीला हो गया। संस्कृत में नील का अर्थ नीला और कंठ का अर्थ गला होता है। इसलिए भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। यह नाम त्याग, करुणा और सृष्टि-रक्षा का प्रतीक है।
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