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विस्तृत उत्तर
पिता को पिण्डभाज पितर इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे श्राद्धकर्ता की सबसे निकटतम ऊर्ध्व पीढ़ी हैं और प्रत्यक्ष रूप से संपूर्ण पिण्ड के अधिकारी हैं। शास्त्रों में पिता को वसु स्वरूप माना गया है। वे कर्ता के भौतिक शरीर और वंशगत अस्तित्व के सबसे निकट कारण हैं, इसलिए श्राद्ध में उन्हें प्रथम पिण्ड प्रदान किया जाता है।
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