विस्तृत उत्तर
पितामह के तर्पण में रुद्ररूप इसलिए कहा जाता है क्योंकि पितृ वर्गीकरण में पितामह, अर्थात दादा, द्वितीय पीढ़ी के पितृ हैं और उन्हें रुद्र स्वरूप माना गया है। रुद्र प्राण-तत्त्व, सूक्ष्म अवस्था और पापों के दहन से जुड़े देव हैं। तर्पण में पितामह के लिए कहा जाता है—'अद्येह अमुक गोत्रः अस्मत् पितामहः अमुक शर्मा रुद्ररूपः तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः।' इस मन्त्र द्वारा यजमान अपने दादा को सामान्य मानव रूप में नहीं, बल्कि रुद्र स्वरूप पितृ के रूप में तर्पित करता है।
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