विस्तृत उत्तर
यदि पितर देव योनि में हों, तो पृथ्वी पर दिया गया श्राद्ध भोजन उनके लिए अमृत के रूप में प्राप्त होता है।
पितर देव योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है को संदर्भ सहित समझें
पितर देव योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है का सबसे सीधा सार यह है: देव योनि में पितरों को श्राद्ध अमृत बनकर मिलता है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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श्राद्ध और तर्पण का स्वर्लोक से क्या संबंध है?
पृथ्वी पर श्रद्धा से किया गया श्राद्ध-तर्पण स्वर्लोक में पूर्वजों को 'अमृत' के रूप में प्राप्त होता है। स्वर्ग में जो जैसा है उसे उसके अनुरूप श्राद्ध का फल मिलता है।
समुद्र मंथन की पूरी कथा क्या है?
समुद्र मंथन में देव-असुरों ने क्षीरसागर मथा, शिव ने विष पिया, रत्न निकले और मोहिनी ने अमृत देवताओं को दिया।
समुद्र मंथन के बाद देवताओं ने स्वर्ग कैसे पाया?
अमृत पान के बाद देवता शक्तिशाली हुए और असुरों को हराकर स्वर्ग वापस ले लिया।
सूर्य और चंद्र ने राहु को क्यों पहचान लिया?
सूर्य और चंद्र ने देवताओं की पंक्ति में बैठे स्वर्भानु असुर को पहचानकर विष्णु को संकेत दिया।
राहु ने अमृत कैसे पी लिया?
स्वर्भानु असुर देवता का वेश बनाकर बैठा और अमृत पी लिया, जिससे राहु बना।
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