विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष और दुर्वासा ऋषि का प्रसंग बताता है कि भक्त की विनम्रता योग-सिद्धि और तप के अहंकार से भी ऊँची होती है। दुर्वासा ऋषि महान तपस्वी और शिव-अंश माने जाते हैं, पर वे क्रोधी स्वभाव के थे। उन्होंने अम्बरीष के जल-पान को अपना अपमान माना और कृत्या राक्षसी उत्पन्न कर दी। अम्बरीष शांत खड़े रहे, क्योंकि वे भगवान की इच्छा में पूर्ण समर्पित थे। सुदर्शन चक्र ने कृत्या को नष्ट किया और दुर्वासा का पीछा किया। अंततः दुर्वासा ने अम्बरीष के चरणों में आकर क्षमा माँगी।
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