विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के नवम स्कंध में आती है। यह कथा भक्त की महिमा, एकादशी व्रत, सुदर्शन चक्र और वैष्णव अपराध के परिणाम को समझाती है। अम्बरीष परम भक्त थे और भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र को उनकी रक्षा के लिए नियुक्त किया था। दुर्वासा ऋषि ने उनके जल-पान को अपराध मानकर कृत्या उत्पन्न की, पर सुदर्शन चक्र ने अम्बरीष की रक्षा की। दुर्वासा तीनों लोकों में भागे, लेकिन उन्हें शांति तब मिली जब वे अम्बरीष के चरणों में लौटे। यह कथा भक्ति की सर्वोच्चता का प्रमाण है।
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