विस्तृत उत्तर
रामधुन और 'राम नाम सत्य है' — दोनों अलग परंपराओं में अलग संदर्भों में उपयोग होते हैं, इसलिए इनकी जप-विधि अलग है।
रामधुन — 'श्री राम जय राम जय जय राम' को रामधुन कहते हैं। यह समर्थ रामदास स्वामी द्वारा महाराष्ट्र में प्रचलित हुई और गांधीजी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया। रामधुन जपने की विधि — श्वास-प्रश्वास के साथ लयबद्ध रूप से बोलें। अकेले या समूह में कर सकते हैं। माला पर भी जप सकते हैं — 108 बार एक माला। प्रतिदिन प्रातःकाल और संध्याकाल में करना उत्तम है।
'राम नाम सत्य है' — यह परंपरागत रूप से अंत्येष्टि यात्रा में बोला जाता है। इसका अर्थ है — राम का नाम ही एकमात्र सत्य है, शेष सब परिवर्तनशील है। इसे जीवन में भी स्मरण करने का विधान है — यह मृत्यु-चेतना जागृत करके भक्ति-मार्ग में प्रेरित करता है। विशेष रूप से माघ, कार्तिक या एकादशी के दिन 'राम नाम सत्य है, सत्य बोलो भगवान' — इस रूप में जपा जाता है।
राम-नाम जप की सामान्य विधि — तुलसी की माला पर 'राम राम' जपें। एक माला में 108 बार। सुबह स्नान के बाद एकांत में बैठकर करें। मन-वाणी दोनों से करें। दिन में जब भी याद आए, 'राम राम' बोलते रहें।
तुलसीदास ने लिखा — 'राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार' — राम-नाम को अपनी जीभ की देहरी पर रत्न-दीपक की तरह रखो।





