विस्तृत उत्तर
रसातल के असुर इतने शक्तिशाली इसलिए बताए गए हैं क्योंकि वे अपनी उत्पत्ति से ही महौजस और महासाहसी हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसातल के निवासियों को 'उत्पत्त्या महौजसो महासाहसिनो' कहा गया है, अर्थात वे जन्म से ही अत्यंत बलवान और अत्यधिक क्रूर तथा दुस्साहसी हैं। निवातकवचों का कवच इतना अभेद्य है कि वायु भी उसे पार नहीं कर सकती। उनकी संख्या तीन करोड़ बताई गई है। कालेय भी युद्धकला में निपुण और क्रूर दानव हैं। फिर भी, भगवान श्री हरि के सुदर्शन चक्र के तेज से उनका बल और अहंकार कुचल दिया जाता है।
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