विस्तृत उत्तर
मधु कैटभ कथा में समुद्र का जल खारा होने का कारण उनके शरीर से निकले मेद को बताया गया है। जब भगवान विष्णु ने दोनों असुरों का वध किया, तब उनके विशाल शरीरों से बहुत अधिक मेद और द्रव्य प्रलय-जल में मिल गया। उसी मिश्रण से जल का स्वभाव बदल गया और वह खारा तथा अपेय माना गया। यह कथा लोक और पुराण की प्रतीकात्मक शैली में समुद्र के खारेपन को समझाती है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह भी है कि जब असुर-विकार सृष्टि में मिलते हैं, तो प्रकृति का स्वरूप बदल जाता है, लेकिन ईश्वर उसी से पृथ्वी का आधार बना देते हैं।
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