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विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण में प्रेत-पिण्ड को पिता, पितामह और प्रपितामह के पितृ-पिण्डों में सम्मिलित किया जाता है। श्राद्ध में अर्पित अन्न केवल भौतिक पदार्थ नहीं माना गया, बल्कि मंत्र, श्रद्धा और संकल्प से युक्त ऊर्जा है। यह ऊर्जा पितृलोक में स्थित पूर्वजों को पुष्ट करती है और मृत आत्मा को प्रेत अवस्था से पितृ पद तक पहुँचाने में सहायक होती है।
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