विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण में पितरों की पदोन्नति क्रमिक रूप से होती है। मृत्यु से सपिण्डीकरण तक नया मृत जीव प्रेत अवस्था में रहता है। सपिण्डीकरण के दिन प्रेत के पिण्ड को पितामह और प्रपितामह के पिण्डों के साथ मिला दिया जाता है। इस कर्म के बाद जो जीव प्रेत था, वह पितृलोक में प्रवेश कर वसु बन जाता है। जो पहले वसु था, अर्थात यजमान का पितामह, वह रुद्र बन जाता है। जो पहले रुद्र था, अर्थात यजमान का प्रपितामह, वह आदित्य बन जाता है। जो पहले आदित्य था, वह मुख्य पिण्डभाज् वर्ग से बाहर होकर उच्चतर लोक, मोक्ष या नवीन योनि की ओर गमन करता है और लेपभाज् श्रेणी में आता है।
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