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विस्तृत उत्तर
सूर्य और चंद्र ने राहु को इसलिए पहचान लिया क्योंकि स्वर्भानु असुर देवताओं की पंक्ति में छिपकर बैठा था। वह देवता का वेश बनाकर अमृत पीने आया था, लेकिन सूर्य और चंद्र ने उसकी वास्तविक पहचान देख ली। वे उसके पास ही बैठे थे, इसलिए उन्होंने तुरंत भगवान विष्णु को संकेत दिया। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया। कथा में सूर्य और चंद्र सतर्कता और प्रकाश के प्रतीक हैं। वे अंधकार या छल को छिपने नहीं देते। इसी कारण राहु आज भी सूर्य और चंद्र से शत्रुता रखता है।
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