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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन की कथा में कहा गया है कि जब भगवान शिव ने हलाहल विष ग्रहण किया, तब कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं। उन बूंदों को सांप, बिच्छू, विषैले कीट और कुछ विषैली वनस्पतियों ने ग्रहण कर लिया। इसी कारण उनमें विष का प्रभाव माना गया। यह पौराणिक वर्णन प्रकृति में विषैले जीवों की उत्पत्ति को धार्मिक प्रतीक के रूप में समझाता है। कथा का भाव यह है कि शिव ने विष का मुख्य विनाशकारी भाग अपने कंठ में रोक लिया, लेकिन उसके सूक्ष्म अंश संसार में विषधारी जीवों के रूप में रह गए।
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