विस्तृत उत्तर
विष्णु जी हर वरदान तुरंत इसलिए नहीं देते क्योंकि उनका उद्देश्य केवल इच्छा पूरी करना नहीं, बल्कि भक्त का अंतिम कल्याण है। वे गुणातीत और दूरदर्शी हैं। यदि कोई वरदान भक्त या संसार के लिए हानिकारक हो, तो वे उसे वैसा नहीं देते। वे भक्त की इच्छाओं से अधिक उसकी आत्मा की मुक्ति देखते हैं। इसी कारण विष्णु भक्त कभी-कभी कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं, पर अंततः उनकी भक्ति गहरी होती है। वृकासुर कथा में यही अंतर स्पष्ट होता है: शिव जी ने शीघ्र वरदान दिया, पर विष्णु जी ने बुद्धि और माया से संकट का समाधान किया।
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