विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने मधु कैटभ से वरदान सीधी याचना की तरह नहीं, बल्कि नीति और समय देखकर मांगा। पहले उन्होंने दोनों असुरों की वीरता, बल और युद्ध-कौशल की प्रशंसा की। अहंकार में डूबे मधु और कैटभ यह समझ बैठे कि वे विष्णु से भी अधिक शक्तिशाली हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि वे विष्णु से कुछ नहीं मांगेंगे, बल्कि विष्णु ही उनसे वर मांगें। यही वह क्षण था जब भगवान ने कहा कि यदि वे प्रसन्न हैं तो उन्हें यह वर दें कि उनकी मृत्यु विष्णु के हाथों हो। इस प्रकार असुर अपने ही वचन में बंध गए।
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