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विस्तृत उत्तर
आस्तीक मुनि ने जनमेजय के सर्पसत्र को रुकवाकर तक्षक को बचाया। जब सर्पसत्र में मंत्रों की शक्ति से पूरे ब्रह्मांड के सर्प अग्नि कुंड में गिरने लगे, तो तक्षक भयभीत होकर इंद्र के सिंहासन से लिपट गया। यज्ञ की शक्ति से इंद्र भी सिंहासन सहित खिंचने लगे। ऐसे समय आस्तीक मुनि, जो माता मनसा देवी के पुत्र थे, आए और उन्होंने यह महायज्ञ रुकवा दिया। इस प्रकार तक्षक के प्राणों की रक्षा हुई।
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