विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और महर्षि भृगु तथा काव्या माता के पुत्र माने जाते हैं। वे अत्यंत विद्वान, तपस्वी और नीति-कुशल थे। देवताओं से युद्ध में असुर बार-बार पराजित हो रहे थे, इसलिए शुक्राचार्य ने मृत संजीवनी विद्या पाने का संकल्प लिया। वे भगवान शिव की तपस्या करने चले गए। उनकी अनुपस्थिति में इंद्र ने असुरों पर आक्रमण किया और असुर काव्या माता की शरण में गए। बाद में शुक्राचार्य मृत संजीवनी विद्या लेकर लौटे और असुरों को पुनर्जीवन देने की शक्ति से देवताओं के लिए बड़ी चुनौती बन गए। काव्या माता वध ने उनके देव-विरोध को और गहरा किया।
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