विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने काव्या माता को किसी निजी द्वेष से नहीं मारा। कथा के अनुसार, काव्या माता ने असुरों को शरण दी और देवताओं को उन्हें छूने नहीं दिया। जब देवताओं ने बलपूर्वक आगे बढ़ना चाहा, तो उन्होंने अपने योगबल से इंद्र को निष्क्रिय कर दिया। इंद्र विष्णु के भीतर शरण लेकर बचे, पर काव्या माता ने विष्णु और इंद्र दोनों को भस्म करने की चेतावनी दी। उस समय विष्णु के सामने धर्मसंकट था: एक ओर स्त्री-वध का पाप, दूसरी ओर सृष्टि-व्यवस्था की रक्षा। इसी कारण उन्होंने सुदर्शन चक्र चलाया।
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