विस्तृत उत्तर
भस्मासुर कथा में शिव और विष्णु की एकता बहुत सुंदर रूप से दिखाई देती है। शिव जी आशुतोष होकर वृकासुर को वरदान देते हैं, पर असुर उसी वरदान से शिव जी को संकट में डाल देता है। शिव जी अपने वचन की मर्यादा बचाते हुए विष्णु की ओर जाते हैं। भगवान विष्णु ब्रह्मचारी या मोहिनी रूप में आकर भस्मासुर को स्वयं अपने वरदान से नष्ट कर देते हैं। यहाँ विष्णु शिव को बचाते हैं, लेकिन यह श्रेष्ठता का प्रसंग नहीं है। यह हरि-हर की संयुक्त लीला है, जिसमें एक रूप की मर्यादा को दूसरा रूप सुरक्षित रखता है।
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