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विस्तृत उत्तर
भस्मासुर ने वरदान का परीक्षण शिव जी पर इसलिए करना चाहा क्योंकि उसके भीतर अहंकार और कृतघ्नता जाग गई थी। उसे शंका हुई कि कहीं शिव जी ने उसे झूठा वरदान तो नहीं दिया। साथ ही उसके मन में यह पापपूर्ण विचार आया कि यदि शिव जी ही भस्म हो जाएँ, तो वह पार्वती जी को प्राप्त कर सकता है और त्रिलोक में सबसे शक्तिशाली बन सकता है। यह सोच उसकी आसुरी वृत्ति को स्पष्ट करती है। जिसने उसे वरदान दिया, उसी पर वह शक्ति आजमाना चाहता था। इसलिए उसका अंत भी उसके ही हाथों हुआ।
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