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विस्तृत उत्तर
भस्मासुर वध के बाद देवताओं ने अत्यंत आनंद और राहत अनुभव की। भस्मासुर के कारण पूरे ब्रह्मांड पर संकट छा गया था, क्योंकि वह शिव जी को भी भस्म करने का प्रयास कर रहा था। जब विष्णु जी की माया से वह अपने ही सिर पर हाथ रखकर राख बन गया, तब देवताओं ने दुंदुभियां बजाईं। गंधर्वों, ऋषियों और देवताओं ने भगवान विष्णु और शिव जी की जय-जयकार की। आकाश से पुष्पवर्षा हुई। यह केवल एक असुर के मरने का उत्सव नहीं था, बल्कि धर्म, देववचन और हरि-हर एकता की विजय का उत्सव था।
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