विस्तृत उत्तर
पुराणों में ब्रह्मा और शिव को तपस्या से शीघ्र प्रसन्न होकर वरदान देने वाले देवों के रूप में दिखाया गया है। ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं और तप की शक्ति को मान्यता देते हैं। शिव आशुतोष हैं और भक्त की तीव्र साधना से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए कई असुरों ने ब्रह्मा या शिव की तपस्या करके महान शक्तियाँ प्राप्त कीं। लेकिन ये वरदान साधक की वृत्ति के अनुसार फल देते हैं। यदि साधक दुराचारी हो, तो वरदान भी संसार के लिए संकट बन सकता है। वृकासुर की कथा इसी बात का उदाहरण है कि शीघ्र वरदान विवेकहीन हाथों में खतरनाक हो सकता है।
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