विस्तृत उत्तर
राक्षस योनि का एक प्रमुख कारण सर्वोच्च व्यक्तिवाद और घोर अहंकार है। राक्षस वह जीवात्मा है जिसके भीतर बुद्धि या तपस्या की कमी नहीं होती, परंतु करुणा, दया और सात्विकता का पूर्ण अभाव होता है। जो मनुष्य मानता है कि संपूर्ण संसार और जीवन केवल उसकी इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं और आत्म-संतुष्टि के लिए बना है, और जो अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए समाज के नियमों या किसी भी प्राणी के जीवन को कुचलने में संकोच नहीं करता, वह सूक्ष्म स्तर पर राक्षस ही है और मृत्यु के बाद राक्षस योनि प्राप्त करता है।
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