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विस्तृत उत्तर
हिरण्यकशिपु दिति और कश्यप का पुत्र तथा जय-विजय कथा में जय का पहला असुर जन्म था। उसने भगवान विष्णु से प्रतिशोध लेने के लिए तपस्या की और ब्रह्मा से कठिन वरदान प्राप्त किए। वह चाहता था कि कोई भी उसे सामान्य स्थिति में मार न सके। जब उसने अपने विष्णु-भक्त पुत्र प्रह्लाद पर अत्याचार किए, तब भगवान नृसिंह रूप में प्रकट हुए। उन्होंने संध्या समय द्वार पर, न भीतर न बाहर, न मनुष्य न पशु रूप में, हिरण्यकशिपु का वध किया।
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